What is Meteorite

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What is Meteorite

उल्का पिंड क्या है? What is Meteorite?

मंगल और बृहस्पति के बीच में ग्रहों के छोटे-छोटे टुकड़े हैं, जिसे क्षुद्र ग्रह कहा जाता है। यह सौरमंडल में बहुत ज्यादा एकत्रित होते हैं। यह स्ट्रायड सूर्य की परिक्रमा करते हैं। कभी-कभी स्ट्राइड आपस में टकरा जाते हैं।आपस में टकराने से इनका डायरेक्शन बदल जाता है और मंगल ग्रह इन्हें अपनी और खींच लेता है। मंगल ग्रह स्टोराइट को आकर्षित करने के बाद अपने नियत स्थान से खिसक जाता है, तब स्ट्राइड सीधे पृथ्वी पर आकर गिर जाता है। पृथ्वी इससे अपनी ओर खींच लेती है इसे ही उल्कापिंड कहते हैं। हमारे पृथ्वी की सुरक्षा वायुमंडल करता है। जिस वजह से एस्ट्रोराइड से हमें खतरा नहीं होता। वायुमंडल और स्ट्रॉयड के बीच में घर्षण होने की वजह से स्टेरॉइड जलने लगता है और जलकर खत्म हो जाता है। जब यह उल्कापिंड एक साथ ज्यादा मात्रा में गिरने लगते हैं, तो उसे लाइट् सावर कहते हैं। ऐसी घटना अगस्त 2017 में हुई थी।



जैसे ही उल्कापिंड वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो यह जलने लगते हैं जिसे हम टूटता हुआ तारा कहते हैं। वर्तमान समय में जिस पृथ्वी पर हम रह रहे हैं पहले वहां पर डायनासोर का राज था। इजिप्टा नाम का उल्का पिंड बहुत ही दूरी से आ रहा था। आज से लगभग 6 करोड़ साल पहले यह स्ट्राइड पृथ्वी पर गिरा था। यह मेक्सिको के पास गिरा था। यह पूरी तरह से तबाही ला दिया था। इसके गिरने से बहुत बड़ा धमाका हुआ। यह धमाका 20 हाइड्रोजन बम के बराबर था। इसके बहुत ज्यादा टेंपरेचर की वजह से सारे डायनासोर मारे गए।

इतने भीषण धमाका के बाद लगभग 10 तीव्रता का पृथ्वी पर भूकंप आया। यह पृथ्वी के इतिहास में अब तक का सबसे भीषण भूकंप था। इस भूकंप की वजह से जितने भी बड़े बड़े जीव जंतु थे सब दबकर मर गये। यह मेक्सिको की खाड़ी के पास गिरा था इसलिए भीषण भूकंप के साथ भीषण सुनामी भी आ गई। सारे जीव जंतु इन सारे घटनाओं का शिकार होकर मर गये। जो जीव जंतु बच गए थे वह भुखमरी से मर गए।

जब एस्ट्रॉयड पृथ्वी पर गिरा था तब पृथ्वी के नीचे टेक्टोनिक प्लेट के टकराने से अफ्रीका में एक पर्वत का निर्माण हुआ था। पृथ्वी पश्चिम से पूर्व डायरेक्शन की तरफ घूमती है। जिस वजह से यह पर्वत बारिश लाने वाली हवाओं को रोक देती थी। मानसून वहां नहीं आने के बाद अफ्रीका का हरा भरा भाग मरुस्थल बन गया। जिसे आज हम सहारा मरुस्थल के नाम से जानते हैं। अफ्रीका को मानव जाति का झूला कहते हैं, क्योंकि यहां से मानव जाति का विकास होना शुरू हुआ था। वैसा छुद्र ग्रह जो पृथ्वी के डायरेक्शन में एंट्री लेता है उसे उल्का कहते हैं। जो पृथ्वी के उल्टे डायरेक्शन में एंट्री लेता है उसे बोलाइट कहते हैं।



जब उल्का पृथ्वी पर गिरता है तो उसे उल्कापिंड कहते हैं। लेकिन जब बोलाइट बिना जले पृथ्वी पर गिरता है तो उसे टेक्टाइट कहते हैं। क्षुद्र ग्रह के पृथ्वी पर गिरने के बाद जो गड्ढा बनता है उसे क्रेटर कहते हैं। ऐसे क्रेटर में जब पानी भर जाता है तो उसे झील कहते हैं। ऐसे झील को क्रेटर झील कहते हैं।
भारत के महाराष्ट्र में एक क्रेटर झील है जिसका नाम है लोनार झील।

उल्का उल्का पिंड के प्रभाव यह पृथ्वी के वायुमंडल में पहुंचने के बाद जलने लगते हैं। जिसे रेड रेन कहते हैं। इससे ग्लोबल वार्मिंग होने लगता है, पृथ्वी का टेंपरेचर बढ़ने लगता है। इसकी वजह से पृथ्वी का द्रव्यमान और गुरुत्वाकर्षण पावर बढ़ने लगी है। पृथ्वी की घूर्णन गति घट रही है। पृथ्वी 900 मिलियन पहले तेजी से घूमती थी तब दिन 18 घंटे का होता था। आज से लगभग 42000 पहले पृथ्वी 21 डिग्री पर झुकी हुई थी। लेकिन अब क्षुद्र ग्रह के गिरने के बाद पृथ्वी साढ़े 23 डिग्री पर झुकी हुई है। सबसे ज्यादा गड्ढे बुध ग्रह पर है क्योंकि वहां पर कोई वायुमंडल ही नहीं है।

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