क्यों गिरती है बिजली थंडर स्ट्रोम। आइए समझते हैं कि क्या होती है लाइटनिंग जिसके गिरने से व्यक्ति की मौत हो जाती है।

बिजली का चमकना हमें पहले दिखाई देता है और बादल का गरजना बाद में सुनाई देता है क्योंकि प्रकाश की चाल ध्वनि की चाल से बहुत ज्यादा अधिक होती है। गर्मी में पानी भाप बनकर ऊपर उठ जाता है तो ऊंचाई पर जाने पर 1 डिग्री सेल्सियस की कमी आ जाती है। जब यह पानी ऊपर जाते हैं तो बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट जातें हैं। यह बर्फ हवा के कारण आपस में टकराने लगते हैं इनके टकराने से घर्षण उत्पन्न होता है और घर्षण की वजह से स्टैटिक करंट उत्पन्न होता है। इस करंट का पॉजिटिव चार्ज ऊपर चला जाता है और नेगेटिव चार्ज नीचे आ जाता है। यह नेगेटिव चार्ज जब गिरता है तो उसे जहां पर पोस्ट इंचार्ज दिखता है वहीं पर गिर जाता है। जैसे ही नेगेटिव चार्ज को पॉजिटिव चार्ज मिल जाता है तो वहां पर व्रजपात होता है जिसे बिजली का गिरना कहते हैं।

जो आसमानी बिजली गिरती है उसका वोल्टेज 100000000 वोल्ट होता है। इसे 100 मेगावाट की बिजली कहा जाता है। इसमें करंट 10000 एंपियर होता है। इसमें जो हिट निकलती है वह 27000 डिग्री सेल्सियस से लेकर 30000 डिग्री सेल्सियस होती है। इसके गिरने का समय बहुत कम होता है 0.0005 सेकंड होता है।

आकाशीय बिजली की उत्पत्ति एक प्राकृतिक घटना है। आकाशीय बिजली का जन्म इन्ट्रा क्लाउड(Intra cloud) बादलों में होता है। जब बादलों के बीच घर्षण और टकराव होते हैं तब उनके ऊर्जा प्रवाह किसी दुसरी विपरीत ऊर्जा से आकर्षित होकर एक दूसरे के साथ टकराते हैं और बिजली(lightning) उत्पन्न होती है, जिसे हम आकाशीय बिजली या आसमानी बिजली(Lightning) कहते हैं।
जब बिजली के चमकने के बाद बहुत जोरों की आवाज इसलिए होती है क्योंकि बिजली में बहुत ज्यादा हिट होती है और आसमान में जो हवाएं होती वह बहुत ठंडी होती हैं और जैसे ही बिजली उन हवाओं से होते हुए गुजरती है तो हवाएं गर्म होने की वजह से एक दूसरे से दूर भागती हैं। इसलिए बादल गरजते हैं।

लाइटनिंग से बचने के लिए वैज्ञानिक बेंजामिन फ्रैंकलीन ए लाइटनिंग राड का निर्माण किया। यह तड़ित चालक कॉपर का बना होता है। जैसे ही बिजली गिरती है तो वह कंडक्टर (चालक) को खोजती है।

बृजपात से बचने के उपाय

किसी भी लग ट्रॉनिक सामान का प्रयोग ना करें।

पेड़ के पास खड़े ना रहे।
खाली मैदान में बिजली बहुत तेजी से गिरती है।

खिड़की के पास खड़े होकर बिजली चमकते का टाइम नहीं रहना चाहिए।

बारिश के समय जब बिजली चमकती है तो छाता नहीं लगाना चाहिए।

हमारे भारत में लगभग ढाई हजार लोग बिजली गिरने से मरते हैं। ज्यादातर बिजली स्टेप पोटेंशियल के कारण लगती है।
बिजली गिरने से जो मौत होती है उसका सबसे ज्यादा प्रभाव हमारे नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। जिससे हमारे हर्ट और फेफड़े धड़कना बंद कर देते हैं।

आदमियों पर 80 परसेंट बिजली गिरती है और औरत पर 20% बिजली गिरती है।

ऐसा जरूरी नहीं है कि बिजली के झटके लगने से लोग मर जाते हैं। जो लोग बिजली के झटके लगने से बच जाते हैं, उनके शरीर पर कुछ दाग धब्बे हो जाते हैं जिससे लीचैनबर्ग बोलते हैं।

यह समझते हैं कि बिजली गिरने पर हमें क्या करना चाहिए, और बिजली गिरने की संभावना सबसे ज्यादा कहां रहती है।

अगर आप खुले मैदान में है तो वहां पर दौड़ना नहीं चाहिए दौड़ने से घर से उत्पन्न होता है और इलेक्ट्रिसिटी जनरेट होती है। बिजली गिरते टाइम तुरंत नीचे बैठ जाना चाहिए। और कान ढक कर बैठना चाहिए ताकि कान के परदे पर कोई नुकसान ना हो।अगर खुले मैदान में चार पांच लोग हैं तो एक दूसरे से 100 फीट की दूरी बना कर बैठना चाहिए। क्योंकि एक साथ बैठने से चार्ज को खींचने की संभावना बढ़ जाती है। क्योंकि हर व्यक्ति अपने आप में एक विद्युत चालक होता है।

बिजली बादलों के टकराने की वजह से उत्पन्न होती है और बिजली को तीन भागों में वर्गीकृत करते हैं।

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पहला इंटराक्लाउड लाइटनिंग- इसमें छोटा सा बादल का समूह होता है जिसमें ऊपर की तरफ पॉजिटिव चार्ज रहता है और नीचे की तरफ नेगेटिव चार्ज रहता है। और उतने में ही टकराने के कारण जो बिजली उत्पन्न होती है उसे इंटरक्लाउड कहते हैं। यह आवाज भी नहीं करते हैं।

दूसरा होता है क्लाउड टू क्लाउड लाइटनिंग- इसमें एक बार और दूसरे बादल के टकराने से बहुत ज्यादा आवाज होती है।

तीसरा होता है क्लाउड टू ग्राउंड लाइटनिंग- इस लाइटनिंग को ही हम ब्रजपात कहते हैं।

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