Onam Festival in hindi: हमारे देश भारत वर्ष में बहुत सारे धर्मों के लोग रहते हैं. हर धर्म के लोगों का अपना विशेष त्यौहार है. कुछ त्यौहार देश के हर कोने में मनाया जाता है. और किसी खास धर्म को किसी क्षेत्र विशेष के लोग ही मनाते हैं. जैसे दुर्गा पूजा की बात की जाए तो यह कोलकाता का बंगाल का मुख्य त्यौहार है. उसी तरह पंजाब के लोग वैशाखी का त्यौहार ज्यादा हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं. इसी क्रम में ओणम पर्व मुख्य रूप से केरल राज्य का त्यौहार माना जाता है. उनको केरल में बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं. इसको मनाने वाले लोग मुख्य रूप से हिंदू धर्म के होते हैं.

Onam Festival in hindi

ओणम को किसानों का त्यौहार बोला जाता है. फिर भी केरल में इस पर्व को सारे लोग मिलकर मनाते हैं. इस दिन विशेष तौर पर केरल में  आधिकारिक तौर पर 4 दिन की छुट्टियां रहती है. हालांकि Onam का त्यौहार केरल में  लोग 10 दिनों तक मनाते हैं. 10 दिनों तक ओणम पर्व की मनाने के उत्साह को देखते हुए 1961 में इसे नेशनल फेस्टिवल भी घोषित किया गया. केरल क्योंकि भारत में एक पर्यटक स्थल के रूप में भी प्रचलित है इसलिए भारत सरकार ने Onam के त्यौहार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसका प्रचार प्रसार किया ताकि ज्यादा से ज्यादा पर्यटक केरल aa सके. और ओणम के Celebration में शामिल हो सके.

 ओणम (Onam) कब मनाया जाता है?

मलयालम सोलर कैलेंडर के अनुसार, ओणम का त्योहार Chingam (चिंगम) महीने में मनाते हैं. यह मलयालम कैलेंडर के अनुसार साल का पहला महीना होता है जो कि सामान्य कैलेंडर के अनुसार अगस्त सितंबर का महीना होता है. दूसरे सोलर कैलेंडर में इसे Simha का महीना भी कहते हैं. इसी तरह अवनी माह तमिल कैलेंडर में होता है. 

इस साल 2021 में ओणम का त्योहार 12 अगस्त से 10 अगस्त 23 अगस्त का समय निर्धारित है.

ओणम कब और क्यों मनाया जाता है?

ओणम पर्व की परंपरा काफी वक्त पहले से चली आ रही है जो आज भी विद्यमान है. ओणम पर्व की कहानी हिंदू माइथोलॉजी के अनुसार राजा असुर और भगवान विष्णु से संबंधित है. लोगों का कहना है ओणम त्योहार में राजा महाबली अपनी जनता से मिलने के लिए साल में एक बार केरल आते हैं विशेष तौर पर राजा महाबली के सम्मान में ही यह त्यौहार मनाया जाता है.

 ओणम से जुड़ी कहानियां

राजा महाबली महाराजा प्रहलाद के पोते थे. पहलाद जिनके पिता असुर हिरण कश्यप भगवान विष्णु के बहुत बड़े भक्त थे.  महाबली भी भगवान विष्णु के बचपन से ही भक्त थे. धीरे-धीरे बीते समय के साथ महाबली बड़े होते चले गए. वह अपने देश की जनता राज्य की जनता से बहुत ही लगाव रहते थे, इसलिए उनका साम्राज्य भी बड़ा होता चला गया. महाबली एक ऐसे राजा थे जिनका साम्राज्य धरती के साथ-साथ स्वर्ग पर भी था. धरती पर उनकी प्रजा  अपने राजा से बहुत प्रसन्न रहते थे. कुछ और वक्त बीतने के बाद राजा महाबली में घमंड जन्म लेने लगा क्योंकि वह असुर थे इसी कारण अन्य देवी देवता इस बढ़ते आसुरी शक्ति को के कारण घबराने लगे. देवी देवता भगवान विष्णु से मदद की गुहार लगाने लगे.

भगवान विष्णु महाबली के घमंड के कारण महाबली को समाप्त करने के लिए माता अदिति के बेटे के रूप में वामन बनकर धरती पर जन्म लिया. भगवान विष्णु का यह अवतार हिंदू शास्त्रों में पांचवा अवतार माना जाता है. इसी वक्त राजा महाबली अश्वमेध यज्ञ कर रहे होते हैं . उनका यह यज्ञ के दौरान वह कहते हैं अगर कोई उनसे कुछ मांगता है या मांगेगा तो वह उन्हें बेहिचक दे देंगे. उनके इस वक्तव्य के बाद वामन यज्ञशाला में राजा महाबली के पास आता है क्योंकि वह एक ब्राह्मण के घर में जन्म लिया था तो ब्राह्मण होने के कारण राजा महाबली वामन से पूछता है कि मैं आपकी सेवा किस तरह से कर सकता हूं और आप बोले कि आपको उपहार में मुझसे क्या चाहिए? वामन इसी वक्त का इंतजार कर रहे होते हैं. इकरारनामा के बाद वामन राजा महाबली से बोलते हैं मुझे 3 डग तक जमीन दे दो.

वामन की यह बात सुनते ही राजा महाबली के गुरुगन अच्छी तरह समझ जाते हैं की वामन कोई साधारण बालक ना होकर किसी का अवतार है इसीलिए उनके गुरु लोग राजा महाबली को  वामन की उनकी इच्छा पूरी करने के लिए मना कर देने को कहते हैं. लेकिन राजा महाबली अपने दिए गए वचनों को लेकर मजबूत इरादे वाले थे. इसी कारण अपने गुरु के मना करने के बावजूद वे वामन  की बात मान लेते हैं और वहां वामन से उनकी 3 डग जमीन ले लेने को कहते हैं. राजा महाबली की यह बात सुनते ही वामन अपने विकराल रूप धारण कर लेते हैं. उनके पहले कदम में पृथ्वी लोक दूसरे कदम में स्वर्ग लोक आ जाता है.

उनके तीसरे कदम के लिए राजा महाबली के पास कुछ भी नहीं होता अपने वचन को पूरा ना कर पाने की स्थिति में राजा महाबली अपना सर काट कर वामन के पैर के नीचे रख देते हैं. अपना सर काटते ही राजा महाबली पाताल लोक चले जाते हैं पाताल लोक जाने से पहले वामन द्वारा रहा राजा महाबली से उनकी एक इच्छा पूछी जाती है तब राजा महाबली की इच्छा होती है कि अपनी जनता से मिलने के लिए राजा को एक बार धरती में  ओणम पर्व में आने दिया जाए ताकि राजा अपनी जनता से मिलकर उनके सुख-दुख को जान सके. इसी कारण यह माना जाता है ओणम पर्व में राजा महाबली अपने लोगों से मिलने पाताल लोक से आते हैं.

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