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China Bhutan Dispute

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China Bhutan Dispute

गलवान घाटी के अभी वर्तमान स्थिति क्या है। इसके बारे में हम बात करेंगे। चाइना गलवान घाटी में 423 मीटर अंदर घुस गया है यहां से हमारे भारत का एरिया चालू होता है। यहां पर ना इंडिया पीछे हटना चाहता है ना ही चाइना।चाइना का कहना है कि अगर आप यहां पेट्रोलिंग करने नहीं आएंगे तब हम यहां से हट जाएंगे। अभी दोनों देश आमने-सामने हैं लेकिन भारतीयों को यहां पर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। भारत सरकार ने अपने सैनिकों के लिए एक विशेष चाकू मंगाया है। और इन चाकू को सैनिक अपने साथ रखेंगे। यहां पर हमारे सैनिकों को मौसम की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। वहां की नदियां भी बहुत ठंडी है। इसलिए भारत सरकार सैनिकों के लिए वाटर प्रूफ कपड़े मंगा रही हैं। यह नॉर्मल कपड़े की तरह ही दिखते हैं लेकिन अंदर से यह हिट प्रूफ वाटर प्रूफ होते हैं। जिससे उन्हें अपना काम करने में आसानी होगी।साथ ही सैनिकों को वाटरप्रूफ जूते दिए जा रहे हैं। जिससे कि वह अपने आप को ठंड से बचा सके। फ्रांस ने भारत को स्पाइसबॉम्ब प्रोवाइड कर दिया है। यह बम बहुत ही घातक होते हैं। यह 400 मिसाइल रेंज के लिए बनाए गए हैं। यह कैसा बम है जो रात में भी काम कर सकता है और दिन में भी। यह जहाज से लगकर सेटेलाइट से टच में रहता है। इसके विंग्स होते हैं, यह अपने दाहिने बाएं मुड़ सकता है। इस बम को सेटेलाइट के द्वारा गाइड किया जा सकता है।



इस बम को छोड़ दिया जाता है और यह दुश्मन के एरिया में जाकर हमला करते हैं। यह बम पहाड़ी एरिया के लिए बहुत ही अच्छा है। यह इतना छोटा होता है, कि यह रडार में भी इसका पिक्चर नहीं दिखता है। स्पाई बम को पायलट गिरा कर चला जाता है। और तब बम रडार से अपना सिग्नल ले लेता है। जीपीएस द्वारा यह बम उस एरिया में जाकर हमला करता है। दुश्मन का कितना भी मजबूत से मजबूत बंकर हो, वहां पर यह पिन पॉइंट एकुरैशी से जाकर हमला करता है। फर्स्ट हमला में यह बंकर कर तोड़ कर अंदर घुसता है उसके बाद ब्लास्ट करता है। पहाड़ी एरिया पर ईसके विंग्स खुल जाते हैं, जिससे यह आराम से पहाड़ी एरिया पर हमला कर सकता है। वहां पर जहाज जाने की जरूरत ही नहीं है। फ्रांस की रक्षा मंत्री ने भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को खत लिखकर भारत के वीर गति को प्राप्त वीर सिपाहियों के प्रति अपनी सहानुभूति दिखाई। साथ ही उन्होंने कहा कि फ्रांस भारत के हर विकट परिस्थिति में इनके साथ है। भारतीय सेना का साथ फ्रांसीसी सेना हर स्थिति में देगी। यह भारत के लिए एक बहुत ही अच्छी खबर है।भारत को युद्ध के दौरान किसी भी चीज की जरूरत होगी किसी भी हथियार की तो फ्रांस के द्वारा उस हथियार की पूर्ति की जाएगी। अमेरिकी संसद को कांग्रेस कहा जाता है इस तरह अमेरिकी संसद में एक प्रस्ताव लाया गया है। अमेरिका अपने सहयोगियों को घातक हथियार और एयरक्राफ्ट देता है क्या हम भारत को नहीं दे सकते हैं। इस प्रस्ताव द्वारा भारत को F22 जैसे F35 घातक हथियार भारत को दिए गए। f-35 को चलने के लिए एयरपोर्ट की जरूरत नहीं होती है। यह वर्टिकल लैंडिंग भी कर सकता है वर्टिकल टेकऑफ भी कर सकता है। अगर यह प्रस्ताव पारित हो जाता है तो भारत को घातक हथियार अमेरिका की तरफ से मिल जाएंगे। कन्वेंशनल जहाजों में हथियार बाहर के हार्ड पॉइंट पर लगा दिए जाते हैं। यह रडार की पकड़ में आ जाते हैं।या पांचवी पीढ़ी का एयरक्राफ्ट वर्टिकल टेक ऑफ कर सकता है। इसे रनवे पर दौड़ने की जरूरत नहीं होती। यह हमला करने के बाद अपने देश में आकर वर्टिकल लैंडिंग भी कर सकता है। अब तक का यह सबसे एडवांस एयरक्राफ्ट है। ताइवान चीन का विरोध खुलकर करने लगा है।

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ताइवान के ऊपर एक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए, चाइनीस एयर फोर्स ताइवान के एरिया में घुस गई। ताइवान ने अमेरिका से मदद मांगी। अमेरिकी एयरफोर्स उसके काउंटर के लिए आ गए। इसलिए चाइना को पीछे हटना पड़ा। चीनी विमान जैसे ही ताइवान के एयर स्पेस में प्रवेश किया उसका पीछा करने के लिए अमेरिकी विमान उसके पीछे निकल गए। यह एक बहुत बड़े फाइट का रूप ले रहा था।चाइना दो एरिया में गिरते जा रहा है लद्दाख और ताइवान के एरिया में। भारत को भी ताइवान का खुलकर साथ देना चाहिए, अंतरराष्ट्रीय मंच पर। नजरिया एक आतंकवादी संगठन बोको हरम नजरिया की सरकार ने यहां पर हमला करने के लिए आतंकवादियों से निपटने के लिए चाइना से एक ड्रोन खरीदा था। यह ड्रोन एक हमलावर ड्रोन है। पाकिस्तान का सबसे बड़ा राज्य है बलूचिस्तान। यह पाकिस्तान में नहीं रहना चाहता है। क्योंकि यहां पर पाकिस्तान की आर्मी बहुत ज्यादा अत्याचार करती है। यह लोग चाइना का भी विरोध करते हैं। बलूचिस्तान वाले अपने आप को स्वतंत्र कराने के लिए एक आर्मी बनाए हैं। जिसे बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी कहते हैं। बी एल ए के विद्रोहियों ने कराची शहर पर जो कि सिंध प्रांत की राजधानी है, इस पर हमला कर दिए। जहां हमला करने पर बहुत सारे मासूम लोग मारे गए। यह हमला बलूचिस्तान की तरफ से किया गया है खुद को स्वतंत्र कराने के लिए। चीन ने गलोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी में एक विवादास्पद बयान दिया। इस मीटिंग में 183 देशों ने भाग लिया। इसमें जानवरों को बचाने के लिए फंडिंग करते हैं और बढ़ावा देते हैं। चाइना दक्षिणी तिब्बत पर अपना अधिकार जमा ता है और अरुणाचल प्रदेश पर भी अपना अधिकार जमाना चाहता है।

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